चारा चबा रहे गौशाला संचालक‚ बड़ागांव थाने के गेट पर खड़े आवारा पशु कर रहे हैं एलेक्स का इंतजार

ग्रामीण भारत‚ स्पेशल

वाराणसी. जनपद के कई क्षेत्रों में खासकर हाईवे पर कई जगह छुट्टा पशुओं का झुंड देखा जाता है. कभी कबार वाहनों से टकराने के चलते इन पशुओं की मौत हो जाती है और और उपर से अनगिनत वाहन गुजर जाते हैं‚ बचती है तो केवल हडि्डयां. अब सवाल यह खड़ा होता है कि इन छुट्टा पशुओं के लिए सरकार द्वारा  जगह-जगह गौशालाएं बनवाई गई हैं तो फिर छुट्टा पशु सड़क पर या खेतों में टहलते हुए कैसे दिखाई पड़ते हैं. इसका जवाब शायद किसी के पास ना हो क्योंकि जवाबदार तो अपने कार्यकाल में बनवाए गए गौशालों के आंकड़े पेश करके अपनी अच्छाइयां गिना लेते हैं और पशुपालक से पशुओं का रिस्ता केवल दूध देने तक ही सीमित है।

थानेदार साहब इन्हें कब मिलेगा न्यायॽ
बड़ागांव थाने के गेट पर दो साल से दर्जनों आवारा पशुओं का झुंड प्रतिदिन देखा जाता है. यह बेजुबान थाने के गेट पर ही क्यों खड़े रहते हैं कहीं और क्यों नहीं जाते यह भी विचार करने वाली बात है. फिलहाल जिसने ‘दिल्ली सफारी’ मूवी देखी होगी उसे पता होगा कि जंगली जानवरों ने कहा था कि यह आदमी है आदमी‚ आदमी पर भी रहम नहीं करते हैं. इसी फिल्म में जानवरों को जंगल बचाने के लिए ‘एलेक्‍स’ नामक तोते को खोजना पड़ता है और काफी संघर्षों के बाद वे अपनी बात को मीडिया और सदन तक पहुंचाने में सफल हो जाते हैं जिससे जंगल लेकिन बड़ागांव थाने के गेट पर इतने दिनों से खड़े आवारा पशुओं की आवाज न तो स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सुनाई दे रही है ना ही थानेदार को‚ अब ऐसे में शायद उनको भी एलेक्स जैसे किसी तोते का इंतजार होगा जो इनके साथ हुए अत्याचार को इंसानी भाषा में बताते हुए थाने में मुकदमा दर्ज कराये.

गौशालाओं में मची है लूट
शीर्षक में ही हमने लिखा है कि चारा चला रहे हैं गौशाला संचालक. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि बहुत से गौशाले ऐसे हैं जो केवल पैसा कमाने के लिए खोले गए हैं. पशुओं के चारे के लिए आने वाले पैसे की जमकर लूट खुश हो रही है. समय से पशुओं को गोशाला में भर दिया जाता है और समय गुजर जाने पर उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है.

यह भी पढ़ें 👇

 

विधायक बोले पिंडरा में है सर्वाधिक गौशाला
पिंडरा विधायक अवधेश सिंह ने रविवार को बलदेव पीजी कॉलेज में अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल की उपलब्धियां गिना रहे थे इस दौरान एक पत्रकार द्वारा आवारा पशुओं को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि पिंडरा विधानसभा में सर्वाधिक गौशाले हैं. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्थानीय युवकों को उन्होंने गौशाला में पशुओं को देखने के लिए रोजगार दिया था लेकिन वही युवक सुबह में पशुओं को पकड़ कर गिनती दर्ज करा लेते थे और शाम को छोड़ देते थे. उन्होंने यह भी बताया कि इसका खुलासा गांव के ग्रामीणों ने ही किया था.

पशुपालक ही हैं दोषी
सड़क पर टहल रहे छुट्टा पशुओं को इस हालत में पहुंचाने का सबसे बड़ा अपराध पशुपालक करते हैं. अधिकतर पशुपालकों द्वारा दुधारू पशुओं को तो रखा जाता है लेकिन जब दूध बंद हो जाता है तूने छोड़ दिया जाता है. इसी को रोकने के लिए सरकार द्वारा पशुओं की टैगिंग की जाने लगी और पशुपालकों के आधार कार्ड से उनको जोड़ा जाने लगा इस योजना को पूरा होने में अभी काफी समय लगेगा और योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े बगैर पूरी हो जाए संभव नहीं प्रतीत हो रहा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright ©2020  Gramin Bharat